वक्त आईना दिखला देता है – संजय सिन्हा

मां तो सुबह बिना आईना देखे ही तैयार हो जाती थी। और जहां तक मेरी बात है, मुझे आईना देखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती थी। नहा-धो कर कपड़े बदल लिए। आईने की ज़रूरत पड़ती थी कंघी के लिए, तो वो मैं करता ही नहीं था। बालों पर उंगलिया फिरा लीं, बस सब ठीक हो गया। कभी-कभी मां मेरे ठुड्डी...

साझा कीजिए